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Antarvasna Story

मुझे आपका लंड चाहिए बाबूजी भाग-1

Team MerivasnastoryBy Team MerivasnastoryApril 25, 2026No Comments46 Mins Read
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Sasur ne bahu ko pela sex story:- दोस्तों, मैं आपकी चुदाई की दीवानी दोस्त नैना हूँ, और आज आपके लिए लाई हूँ एक धाँसू कहानी – सुमन और उसके ससुर किशोरीलाल की। इस स्टोरी में आप ससुर-बहू की गर्मागर्म चुदाई का पूरा मजा लेंगे, कैसे वो मोटा लंड चूत में घुसता है और रसीली चीखें निकलती हैं। भाई लोग, ये कहानी काफी लंबी है, कम से कम 2-3 भागों में पूरी होगी, हर भाग में चुदाई के नए-नए सीन भरे पड़े हैं। अगर पढ़कर आपका लंड न खड़ा हो या चूत न गीली हो जाए, तो मुझे जोरदार गाली देना या कुछ भी बोलना – मैं तैयार हूँ! तो इस ससुर-बहू की सेक्स स्टोरी पढ़कर कैसा लगा, नीचे कमेंट्स में जरूर बताना। चलो, अब स्टोरी शुरू करते हैं, तैयार हो जाओ चुदाई के लिए!

Sasur ne bahu ko pela sex story

मै सबसे पहले सुमन के बारे में आपको बता दूँ – सुमन कानपुर की रहने वाली थी. बरहवीं तक पढ़ी थी वह, पर उसके पिताजी ने आगे पढ़ाई नहीं कराई. बिज़नेस था उनका और काफी पैसा भी उनके पास था. सुमन वैसे भी पढ़ाई की तरफ आकर्षित नहीं थी. नौकरी का तो घरवालों ने सोचा भी नहीं थी और ना ही सुमन कोई ज़िद्द करने वाली थी. 23 उम्र में सुमन का बदन भरा हुआ था. 36 की 26 की कमर और 38 की गांड हो गयी थी. काफी नखरों में पली थी सुमन. उसका व्यवहार भी सुमन ही था. उसके पिता किशोरीलाल ने अपने बचपन के दोस्त किशोरीलाल के बेटे से बात चलाई. किशोरीलाल कानपूर के आउटलेट पे रहते थे उनका बेटा उमेश मुंबई में पिता का कारोबार संभालता था. किशोरीलाल की पत्नी और उमेश की माँ मर चुकी थी. किशोरीलाल ने ही उमेश को पाला बड़ा किया था. किशोरीलाल बिज़नेस मैन हैं कानपूर के पर अब सब उमेश ही संभालता है। नंदलाल फ्री विचारों के वेल बिल्ट मेल है 48 की उम्र में भी वह जवान है. शादी जल्दी हो गयी थी और पत्नी की मौत समय से पहले तो किशोरीलाल के काफी सपने अधूरे रह गए थे जो शायद अब पूरे होने वाले थे.

रामवती (35 साल) नंदलाल की काम वाली, पकाने वाली, मालिश करने वाली और हाउसकीपर भी. दो साल पहले ही किशोरीलाल के घर का हिस्सा बनी और किशोरीलाल के बैडरूम का भी.

मनु 36 साल नंदलाल का ड्राइवर यह पांच साल से किशोरीलाल के साथ है. यह सब जानता है और जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ेगी आप जान जाएंगे यह कैसा मनचला फ्री माइंडेड और रंगीला इंसान है.

जमुना 40 साल नंदलाल की बहन यह भी कानपूर में अपने पति के साथ रहती है. किशोरीलाल और इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.

अब आगे बढ़ते है –सुमन को उमेश के घर आये हुए एक साल हुआ था. उमेश कारोबार संभालता और कानपुर और मुंबई में शफल करता। सुमन रामवती के साथ घर का काम संभालती और किशोरीलाल थोड़ा बहुत हिसाब किताब देख लेता, कभी क्लब चला जाता, कभी घर में ही रहता. एक्सरसाइज का बड़ा शौक था और एक जिम घर में भी बना लिया था. सुमन भी वहाँ कभी कभी लाइट एक्सरसाइज कर लेती. सुमन घर में कभी शलवार कमीज तो कभी साडी पहनती और रात को मैक्सी. पल्लू शादी कुछ महीने बाद ही छूट गया था, जब किशोरीलाल ने उसे मना किया था. वह नए ज़माने की औरत थी और किशोरीलाल यह समझता था. उमेश इन दिनों घर पे ही था. अभी मुंबई का प्रोग्राम बना नहीं था. दोनों बाप बेटे काफी करीब थे दोस्त जैसे. किशोरीलाल ने अभी अभी नाश्ता किया था जो रामवती ने परोसा था। एक दम से किशोरीलाल को कुछ सुनाई दिया सुमन और उमेश के कमरे से. आवाज़ें बाहर तक आ रही थी, जो किशोरीलाल और रामवती सुन रहे थे. Sasur ne bahu ko pela sex story

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सुमन – इसीलिए तो मुंबई में ज़्यादा समय बिताते हो. ऐसा ही था तो शादी क्यों की. ?

उमेश – दोस्त हैं हम दोनों, इससे आगे सोचने की ज़रुरत नहीं.

सुमन – यह ऐसी तसवीरें निकालते है दोस्त.

उमेश – हाँ एक दोस्त की पार्टी में खींची गयी थी.

सुमन – ठीक है मनाओ पार्टी मुंबई में. अब की बार आने की जल्दी नहीं करना. हम रह लेंगे.

किशोरीलाल ने रामवती का चेहरा देखा इतने में उमेश भी नाश्ता करने आ गया और किशोरीलाल के सामने बैठा. किशोरीलाल ने रामवती को नाश्ता परोसने को बोल दिया उमेश को और उसे इशारे से वहाँ से जाने को कहा.

किशोरीलाल – सब ठीक?

उमेश – हाँ बाबूजी! बस वह राधिका के बारे में! आप जानते हैं न उसे! सिंह साब की बेटी! फ्री है थोड़ी सी! सुमन यूँ ही।

किशोरीलाल – बहु को मना उमेश. राधिका का छोड़! वह भी तो शादी शुदा है! तू अपनी शादी संभाल. अगर तुझे ठीक लगे तो सुमन को वहीँ ले जा मुंबई.

उमेश – बाबूजी आपको पता है मैं कभी मुंबई कभी पौंआ, कभी गुजरात, ट्रेवल करता हूँ. एक जगह नहीं रहता. सुमन को कैसे.

किशोरीलाल – भाई तू जान और तेरी पत्नी. मैंने भी बहुत ट्रेवल किया है. पर तेरी माँ को शिकायत का मौका कभी नहीं दिया.

उमेश – कैसे बाबूजी. आप ने यह सब कैसे मैनेज किया. ?

किशोरीलाल – खुली किताब बन के, किसी दिन तुझे समझाऊंगा. अगर समझ के मेरी बात हैंडल कर पाया तो ज़िन्दगी में मज़ा आएगा.

उमेश – मैं समझा नहीं बाबूजी.

किशोरीलाल – तू नाश्ता कर के दूकान पे जा. रात को एक एक पैक लगाके बात करेंगे.

उमेश – पिलायेंगे और क्लास भी लेंगे मेरी.

किशोरीलाल – ऐसे ही समझ, पर मेरा फार्मूला कामयाब हुआ था. देखते है तेरा क्या होता है.

उमेश – ठीक है. रात को फिर क्लास में मिलते हैं.

किशोरीलाल और उमेश मुस्कुराये. उमेश चला गया किशोरीलाल बंगले के बरामदे में पेपर पढ़ने आ गए. कुछ देर बाद सुमन वहाँ आयी चुप सी थी. किशोरीलाल ने उसकी तरफ देखा.

सुमन – बाबूजी कुछ दिन के लिए मैं मायके जाना चाहती हूँ.

किशोरीलाल ने पेपर नीचे रखा और उसे देख के मुस्कुराये.

किशोरीलाल – उससे कुछ ठीक नहीं होगा.

सुमन – मैं समझी नहीं बाबूजी.

किशोरीलाल – बैठ! मैं समझाता हूँ.

सुमन उनकी बगल वाली कुर्सी पे बैठ गयी.

किशोरीलाल – देख मैंने सब सुन लिया.

सुमन थोड़ी सी ऐम्बर्रेस्सेड थी वह नीचे देखने लगी.

किशोरीलाल – देख पति पत्नी में ऐसा होना चाहिए, पर ज़्यादा नहीं. जब मैं उमेश की उम्र का था मैं भी काफी बाहर रहता था. लोगों से मिलता था और लड़कियों से भी.

सुमन अचानक से उनके चेहरे को देखती है.

किशोरीलाल – खुला छोड़ दे अपने पति को.

सुमन उनकी बात समझ नहीं पायी.

किशोरीलाल – उसे बाँध के रखेगी तो वह गलती करेगा अगर बांधना है तो अपने प्यार से बाँध फिर वह बंधा रहेगा.

सुमन – बाबूजी आप ने वह तसवीरें देखी नहीं है. इसीलिए आप.

किशोरीलाल – बहु! देखने की ज़रुरत नहीं है. पर तुझे मेरी बात समझना होगी.

सुमन – कहिये बाबूजी.

किशोरीलाल – बेटी एक बात तू ध्यान से सुन ले, तेरी शादी इस घर में हुई है तेरा अच्छा बुरा मैं देखूंगा, तेरे पिताजी नहीं. तू फिर से मायके जाने की बात नहीं करेगी.

सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.

किशोरीलाल – चल अच्छा है यह बात तो समझ गयी. अब दूसरी बात! और देख अब हम दोस्त की तरह बात कर रहे हैं. ससुर और बहु नहीं! ठीक?

सुमन ने फिर हाँ में सर हिला दिया.

किशोरीलाल – अब सोच तू उमेश है और मैं सुमन! ठीक?

सुमन ने सवालिया नज़रों से देखा उनको.

किशोरीलाल – मैं समझाता हूँ इतना टेंशन मत ले. देख अगर बोल रहा हूँ और एक दोस्त की तरह समझा रहा हूँ. मेरी बात का बुरा नहीं मानना.

सुमन – नहीं मानूंगी बाबूजी. आज आप से बात करके दिल हल्का हो रहा है.

किशोरीलाल – देख कुछ बातें दिमाग को खुला रख के सुनी और समझी जाती हैं. ठीक?

सुमन हाँ में सर हिला दी.

किशोरीलाल – अगर मैं सुमन हूँ और तू उमेश और तुझसे कोई गलती हो जाती है राधिका वाले मामले में. सोच के कुछ ऐसी सिचुएशन बनती है मुंबई मे और तुझे राधिका के साथ सोना पड़ता है.

सुमन एक दम से सकपका गयी, शर्मा भी रही थी और दंग भी थी, के किशोरीलाल उससे ऐसी बातें कर रहा है. ऐसा पहले तो नहीं हुआ था.

किशोरीलाल – चौंक गयी?

सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.

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किशोरीलाल – और तू सो गयी राधिका के साथ और मुझे मैं सुमन हूँ यह बात मालूम पड़ती है मेरा तुझसे क्या सवाल रहना चाहिए? तू बता.

सुमन – मै. मैं. मैं बाबूजी क्या पूछूँगी? मर जाउंगी मैं तो.

किशोरीलाल – नहीं जानती है तेरी सास ने क्या पूछा था मुझसे? जब मुझसे यह गलती हुई थी. ?

सुमन ने ना में सर हिला दिया.

किशोरीलाल मुस्कुराये.

किशोरीलाल – उसने पूछा कैसा लगा किसी और के साथ? और तेरी सास यह अच्छे से पूछ रही थी गुस्से में नहीं.

सुमन – उन्होंने ऐसे कहा?

किशोरीलाल – हाँ! और मैं सकपका के रह गया. कुछ न कह सका. मैं सोचता रहा के उसने ऐसे क्यों पूछा. और फिर दो दिन बाद उसने असली बम गिराया.

सुमन – क्या बाबूजी! मैं समझी नहीं.

किशोरीलाल – उसने कहा अगर उससे कोई गलती हो जाती है तो मुझे भी वही सवाल करना पड़ेगा जो उसने मुझसे किया था.

सुमन दंग रहके उनका चेहरा देखने लगी.

किशोरीलाल – उसके बाद मेरी ऐसी मजाल कभी नहीं हुई. मैं उसे सब कुछ बताने लगा एक खुली किताब बन गया और हम एक दूसरे के और करीब आ गए. उसके बाद हमने सिर्फ एन्जॉय किया अपनी लाइफ में. यह समझ कर के हम हमेशा से एक दूसरे के ही रहेंगे चाहे कितने लोग हमारी ज़िन्दगी में क्यों न आएं हम साथ ही रहेंगे खुश. एक दूसरे के साथ.

सुमन – तो आपका मतलब है मैं भी उमेश को वह गलती करने दूँ. ?

किशोरीलाल – नहीं बहु! पर तू उसे रोक भी तो नहीं पाएगी. ज़िन्दगी का क्या भरोसा. मेरी बात तू समझी नहीं. देख अगर तुझे पता चला तो तू उससे पूछेगी न अगर पता ही नहीं चला तो क्या करेगी. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन – मैं कंफ्यूज हूँ बाबूजी.

किशोरीलाल – मेरे यह कहने का मतलब है के जब आग नहीं लगी है तो पानी की बाल्टी क्यों भरना. वह जो करता है करे! तू क्यों टेंशन लेती है फ़ालतू में. तेरा इतना बड़ा घर है तेरे बाबूजी हैं तू जो चाहती है वैसे ही होता है इस घर में तो तू खुश रह न. क्यों टेंशन लेना फ़ालतू का? जब कुछ होगा और तुझे मालूम पड़ा तब देखेंगे क्या करना है. तब तक तो तू आराम से अपनी लाइफ एन्जॉय कर, खा पी, शॉपिंग कर दिल बहलाये रख.

सुमन – बाबूजी एक बात पूछूं अगर बुरा नहीं लगे तो. ?

किशोरीलाल – मैंने पहले ही कहा था हम दोस्त जैसे बात कर रहे हैं! है ना?

सुमन – बाबूजी अगर माँ जी भटक जाती तो, क्या आप उन्हें माफ़ करते. ?

किशोरीलाल ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा सुमन उसके यह रिस्पांस से चौंक गयी किशोरीलाल ने हंसना बंद किया.

किशोरीलाल – मैंने कहा ना के हम और करीब आ गए और लाइफ एन्जॉय करने लगे. तूने पूछा नहीं कैसे.

सुमन – मैं पूछने वाली थी पर डर गयी.

किशोरीलाल – तू डर गयी और यहां मैं दोस्त की तरह तुझसे बात कर रहा हूँ! बात करू या नहीं?

सुमन – सॉरी बाबूजी.

किशोरीलाल – दोस्ती में नो सॉरी नो थैंक यू. चल बताता हूँ. तेरी सासु माँ मुझसे पूरा खुल गयी और मैं उससे. हम एक दूसरे से कुछ भी बात करते मेरा मतलब है पति पत्नी के सम्बन्ध को लेके.

सुमन थोड़ा शर्मायी.

किशोरीलाल – देख शर्मा मत. अब तू भी शादी शुदा है. यह सब समझ सकती है! है ना?

सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.

किशोरीलाल – देख जब नयी नयी शादी होती है ना तो पहले एक साल बहुत अट्रैक्शन रहता है, फिर धीरे धीरे बच्चे होते हैं और फिर इतनी ज़िम्मेदारियाँ बढ़ जाती है के पति पत्नी बस अपने अपने किरदार निभाते हैं. रिश्ते में बदलाव आता है जो पति पत्नी एक दूसरे के बदन के दीवाने थे कुछ साल बाद एक दूसरे को हाथ तक नहीं लगाते. तूने भी देखा होगा यह.

सुमन – हाँ.

किशोरीलाल – कहाँ?

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सुमन – अपने ही घर में बाबूजी. पिताजी हमेशा माँ को डांटते ही रहतें हैं और माँ भी उनसे हमेशा नाराज़ रहती है.

किशोरीलाल – देखा तू ने यह सब इतने करीब से देखा और तू ही नहीं समझ पा रही है.

सुमन – बाबूजी प्लीज खुल के बताईये ना आप और माँजी ने क्या किया.

किशोरीलाल मुस्कुराये और सुमन की तरफ देखा.

किशोरीलाल – सुन पाएगी?

सुमन – आप ने ही कहा हम दोस्त हैं.

किशोरीलाल मुस्कुराये फिर से उसकी बात पे.

किशोरीलाल – हम ने हमारी सेक्स लाइफ खोल दी.

सुमन – मतलब?

किशोरीलाल – मतलब तेरी सास ने मुझे छूट दे दी और मैंने उसे.

सुमन – बाबूजी. यह! यह! आप क्या कह रहे हैं. ?

किशोरीलाल – सच बता रहा हूँ बहु! जब एक पति पत्नी यह मान के चलते हैं के उन्हें कुछ बाँध रहा नहीं है तो वह एक दूसरे के और करीब आ जातें हैं. मैंने और तेरी सास ने ऐसा ही किया. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन – मलतब आप दोनों किसी और के साथ.

किशोरीलाल – किसी और के साथ नहीं बहुतों के साथ किया.

सुमन – बाबूजी? पर इससे आप दोनों करीब कैसे आये.

किशोरीलाल – करीब भी आये और एन्जॉय भी करने लगे के हम दूसरों की तरह एक खुशहाल शादी का ढोंग नहीं करते. सही में खुश रहतें हैं. देख बेटा जब तक एक इंसान का बदन खुश है न उसका दिमाग खुश रहता है. जिस दिन शादी में सेक्स बंद हो गया समझ लेना शादी ख़तम. और एक इंसान के साथ तुम कितने साल सेक्स एन्जॉय कर सकते हो. एक! दो! पता नहीं कितने.

सुमन – बाबूजी मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है.

किशोरीलाल – अब उसका कोई इलाज नहीं है बहु मेरे पास.

सुमन – पर मैं क्या करू बाबूजी. मेरा प्रॉब्लम हल कैसे होगा.

किशोरीलाल – तेरे टेंशन ना लेने से. उमेश तुझे खुश रखता है न.

सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.

किशोरीलाल – तो अच्छा है और जब तक खुश रखता है तू रह, और नहीं रख पाया तो भी उदास मत हो, यह मत कह के मैं मायके जाना चाहती हूँ, उससे कुछ हल नहीं होता. तू बात कर उमेश से अगर बात वहाँ तक पहुंची तो. उसे पूछ के वह बाहर एन्जॉय करना चाहता है तो उसे छूट दे. और अगर तुझे प्रॉब्लम नहीं है तो तब ही कर. या फिर मेरे और तेरे सास जैसे दोनों एन्जॉय करो साथ में किसी और के साथ. पर हर हालत में टेंशन न लो और अपने बदन को संतुष्ट रखो! दिमाग ठीक रहेगा.

सुमन – बाबूजी! आप को लगता है उमेश इसके लिए.

किशोरीलाल – अरे वह तो खुश हो जाएगा! पर देख बहु यह उन लोगों के लिए है जो इसे हैंडल कर सकतें हैं सब के लिए नहीं. इसमें डर भी रहता है.

सुमन – मैं जानती हूँ बाबूजी! दो धारी तलवार है.

किशोरीलाल – अब की न समझदारी वाली बात. देख अभी तू उमेश से झगड़ मत. अगर वह मुंबई जा रहा है तो अच्छे से मुस्कुराके भेज उसे और उसके आने के बाद भी कुछ पूछ मत. सवाल शादी के लिए अच्छे नहीं होते. और सच छुपता नहीं है. तू औरत है तू आसानी से पकड़ लेगी अगर कुछ गड़बड़ है तो.

सुमन उसकी बातें ध्यान से सुन रही थी.

किशोरीलाल – और उमेश मेरा बेटा है! कॉलेज में उसकी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं थी. वह जान बूझ के अपनी शादी को खराब नहीं करेगा और मैंने मुंबई को करीब से देखा है वहाँ ना चाहते हुए भी कुछ ऐसी बातें करना पड़ती है. वह किसी से प्यार नहीं करेगा प्यार तो तुझसे ही करेगा. मेरा यकीन कर. और तू अपने आप को कम मत समझ. मुंबई की किसी लड़की से तू कम नहीं है.

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सुमन हल्का सा मुस्कुरा देती है.

सुमन – आपने पहले मुझसे बात क्यों नहीं की बाबूजी. आज आपसे बात करके ज़िन्दगी आसान लगने लगी है.

किशोरीलाल – ज़िन्दगी को भाव मत दे बहु. उसे अपनी जगह पे रख. तब मज़ा आएगा. समझी.

सुमन ने मुस्कुराके हाँ में सर हिला दिया.

किशोरीलाल – अब चाय पीने का बड़ा मन कर रहा है.

सुमन – मुझे भी! मैं बनाती हूँ! अभी लायी.

सुमन उठी और पलटी पहली बार किशोरीलाल ने उसकी कमर और उसका बदन इतने गौर से देखा था उसे अच्छा लगा. तीन दिन बीत गए उस दिन की बात को उमेश मुंबई चला गया सुमन के स्वभाव में बदलाव आने लगा वह किशोरीलाल के साथ ज़्यादा बात करने लगी। उमेश से भी फ़ोन पे बात करती पर सवाल नहीं करती। मुस्कुराती और खुश रहती घर के काम में बिजी रहती. आज सैटरडे था और हर सैटरडे की तरह किशोरीलाल क्लब जाने की तैयारी कर रहे थे। शाम के छह बज रहे थे और सुमन उनके कमरे में चाय देने आयी. Sasur ne bahu ko pela sex story

किशोरीलाल – उमेश का कोई फ़ोन आया?

सुमन – कल आया था बाबूजी! वह अहमदाबाद के लिए निकल रहे थे, राधिका साथ थी.

किशोरीलाल – बिज़नेस पार्टनर की बेटी है.

किशोरीलाल सुमन के सामने आये और उसके कंधे पे हाथ रख दिया.

किशोरीलाल – बुरा लग रहा है.

सुमन – नहीं बाबूजी. वह जो भी करें अगर बोल के करें तो अच्छा लगेगा.

किशोरीलाल – और अगर वह आगे बढ़ गया तो राधिका के साथ.?

सुमन – बोलेंगे तो अच्छा रहेगा! मैं मना कर नहीं सकती हूँ और करुँगी भी नहीं! आप की बातें मान के, बस टेंशन नहीं लूंगी.

किशोरीलाल – उसकी याद आती है?

सुमन – क्यों नहीं आएगी बाबूजी.

किशोरीलाल – वैसे नहीं.

सुमन – मैं समझ गयी आपका कहना बाबूजी.

वैसे भी आती है! बूढी तो नहीं हूँ ना.

किशोरीलाल – बिलकुल नहीं है! पता है जब दिल भारी हो तो क्या करना चाहिए?

सुमन – क्या बाबूजी?

किशोरीलाल – अपने बाबूजी के साथ बैठ के बातें करना चाहिए. यह अभी कायदा बनाया है.

सुमन मुस्कुराती है.

सुमन – करना तो मैं भी चाहती हूँ बाबूजी. पर आप तो क्लब जा रहे हैं.

किशोरीलाल – तो चल नहीं जाता. आज रामवती और मनु भी नहीं हैं हम दोनों खूब बातें करेंगे.

सुमन – सच! आप क्लब नहीं जाएंगे?

किशोरीलाल – कह दिया बहु! पर आज सुबह लेट उठा था. एक्सरसाइज नहीं कर पाया. वहीँ जिम में चलते हैं उधर मैं एक्सरसाइज करूँगा और तू बातें.

सुमन – क्या बाबूजी! यह ठीक थोड़ी है, आप एक्सरसाइज करेंगे और मैं बातें?

किशोरीलाल – तो तब ही एक्सरसाइज कर ले मेरे साथ, अच्छा ही है घर में बैठे रहने से मोटापा आ जाएगा.

सुमन – तो अब मैं आपको मोटी दिखती हूँ.

किशोरीलाल – अरे नहीं बहु! पर हो तो सकती है. अभी आदत लगेगी एक्सरसाइज की तो मोटापा छुएगा तक नहीं.

सुमन – पर कपडे नहीं हैं मेरे पास जिम में पहनने के लिए.

किशोरीलाल – मैं देता हूँ, तेरी सास के हैं, टी-शर्ट और ट्रैक पैंट! देख!

किशोरीलाल कप्बोर्ड के पास गए और खोल दिया नीचे कैबिनेट से एक काला पतला टी-शर्ट निकाला और पतली पैन्ट्स उन्होनें सुमन को दिखाया.

सुमन – बाबूजी यह काफी पतले और छोटे लगते हैं. मैं आपके सामने इन में?

किशोरीलाल फिर अपने हाथ सुमन के कंधे पे रखतें हैं.

किशोरीलाल – मुझे अच्छा लगेगा! अगर तू अपनी सास के कपडे पहनेगी तो.

सुमन – फिर छोटे ही सही बाबूजी! मैं पहनूंगी।

किशोरीलाल – जा पहन ले और जिम में आ जा मैं भी चेंज करके वहीँ आता हूँ।

सुमन – ठीक है बाबूजी!

कुछ देर बाद किशोरीलाल अपनी लंगोट में जिम पहुँच गए उन्होनें डम्बल्स उठाना शुरू कर दिए। दो मिनट बाद सुमन पहुंची, पर अंदर आने से शर्मा रही थी, किशोरीलाल उसके पास दरवाज़े तक गए। सुमन अपने हाथों से अपना सीना छुपा रही थी.

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किशोरीलाल – बहु अगर ज़्यादा ही अनकम्फ़र्ट हो, तो कुछ और पहन लो, तुम्हारी मर्ज़ी का.

सुमन – नहीं बाबूजी ठीक है! मैं अपने हाथ हटाती हूँ.

जैसे ही सुमन ने अपने हाथ हटाए किशोरीलाल का दिमाग खराब हो गया, उसकी आधी चूचियां बाहर थी, चूत के पास की जगह ट्रैक में कसी हुई थी कपडा बदन से चिपक गया था बदन और कपडे में ज़्यादा अंतर नहीं था.

किशोरीलाल – बहु मैं फिर कहता हूँ अगर अनकंफर्ट हो तो चेंज कर लो.

सुमन – नहीं बाबूजी. आज से इसी में आपके साथ एक्सरसाइज करुँगी और इसमें परफेक्ट बैठ के बताउंगी.

किशोरीलाल – यह हुई न बात. चल आजा. तुझे थोड़े फ्री हैंड कसरतें बताऊँ.

किशोरीलाल सुमन को अंदर ले जाता है सुमन उसके लंगोट को गौर से देखती है ऊपर से किशोरीलाल कुछ नहीं पहने थे. अंदर पहुँच के बहुत सारा इक्विपमेंट देख रही थी. सुमन ने किशोरीलाल ने उसे इशारा किया.

किशोरीलाल – यह सब मत देखो बहु! तुम्हारे काम का बस वॉकर है, पर उससे भी पहले तुम्हारी बॉडी फ्री करनी होगी फ्री हैंड एक्सरसाइज से. उसके बाद वॉकर! ठीक है?

सुमन – जैसे आप कहें.

किशोरीलाल – तो अब मुझे फॉलो करो ऐसे दोनों हाथ ऊपर फिर नीचे फिर ऊपर फिर नीचे.

सुमन – ऐसे?

किशोरीलाल – बिलकुल सांस अंदर और बाहर एक ले से लो.

ऐसे.किशोरीलाल सुमन को गाइड करते हुए खुद भी कर रहा था। कुछ देर बाद सुमन का पसीना छूटने लगा, किशोरीलाल ने उसे रोका.

किशोरीलाल – चलो अभी चेंज करते हैं.

किशोरीलाल अब झुकते हैं और अपने घुटने अपने हथेली से छूते हैं.

किशोरीलाल – अब कुछ देर यह करो. सुमन जैसे झुकी किशोरीलाल के सामने उसकी अब आधे से भी ज़्यादा बाहर आती चूचियां दिखने लगी. सुमन ने उनकी नज़रों को देखा पर रुकी नहीं, किशोरीलाल भी करते रहे, अब सुमन रुक गयी.

सुमन – बाबूजी नहीं हो रहा है बदन दर्द कर रहा है.

किशोरीलाल – तो बस कर दो बहु. पहला दिन है. आज के लिए इतना ही काफी है. कल देखेंगे.

सुमन – थैंक्स बाबूजी. मैं थोड़ा स्नान कर लेती हूँ. पसीना आ गया है.

किशोरीलाल – हाँ बहु! मैं भी आता हूँ थोड़ी देर में. फिर बैठते हैं साथ.

सुमन नीचे चली जाती है किशोरीलाल उसके नितम्ब को घूरते रहतें हैं फिर कसरत करने लगते हैं. आधे घंटे बाद किशोरीलाल नहा के और चेंज करके कुर्ते पयजामे में नीचे आतें हैं, सुमन चाय लेके आती है आँगन में, शलवार कमीज में. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन – पहली चाय तो पी नहीं आपने इसीलिए और बना लायी.

किशोरीलाल – तुझे कुछ कहना नहीं पड़ता है बहु. समझ जाती है तू.

सुमन मुस्कुराके उनके हाथ एक चाय का प्याला दी और उनके सामने कुर्सी पे बैठके खुद एक कप ले ली. दो चुस्कियों के बाद उसने किशोरीलाल का चेहरा देखा.

सुमन – बाबूजी. आप से एक बात पूछूं?

किशोरीलाल – अरे पूछ ना, हर बात के लिए परमिशन चाहिए क्या. ?

सुमन हंस दी. सुमन – बाबूजी! आप और माँ किस किस के साथ.

किशोरीलाल मुस्कुराये और उसका चेहरा देखे.

किशोरीलाल – वह सब तू सुन के क्या करेगी बहु? और वह सब डिटेल्स देने में मैं भी कतराऊंगा.

सुमन – अच्छा! तो अब हम दोस्त नहीं है न?

किशोरीलाल – बहु! ऐसी बात नहीं है!

सुमन – तो खुल के बताईये न बाबूजी! आज तो यहां कोई सुनने वाला भी नहीं है.

किशोरीलाल – बहु तू बहुत ज़िद्दी है. शर्मा जायेगी तू.

सुमन – ट्रैक सूट में तो नहीं शर्मायी ना! तो अब क्यों शर्माउंगी?

किशोरीलाल – ठीक है. जब कुछ ज़्यादा हो रहा होगा तेरे लिए तो रोक देना.

सुमन – ठीक है.

किशोरीलाल – तो सुन. तू सच में सुन्ना चाहती है.

सुमन – बाबूजी. कहिये न! अब आप शर्मा रहे हैं.

किशोरीलाल – अच्छा बाबा. अब नहीं शर्माता बस. सुन. तेरी सास और मैं एक दूसरे से काफी कुछ डिसकस करते थे. खुलके बात करते थे.

सुमन – बाबूजी मेन मुद्दे पे आईये न. यह सब तो आप कह चुके हैं पहले भी.

किशोरीलाल – तू है न बड़ी खराब है. अपने बाबूजी को सता रही है.

सुमन – सताऊँगी नहीं तो आप नहीं बताएँगे. दोस्त! याद है न.

किशोरीलाल – हाँ हाँ याद है. ठीक है. तेरी सास अदला बदली के लिए राज़ी थी.

सुमन – क्या? अदला बदली?

किशोरीलाल – देख अब तू रोक रही है.

सुमन – अच्छा अच्छा सॉरी. कहिये.

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किशोरीलाल – तो हम मिले मेरे अच्छे दोस्त और उसकी बीवी से. फिर क्या था. अदला बदली हो गयी.

सुमन – बाबूजी. यह गलत हैं हाँ. आप कुछ नहीं बता रहे.

किशोरीलाल – तो तू क्या कमरे के डिटेल्स भी लेगी. समझ जा न के कमरे में क्या हुआ होगा.

सुमन – ठीक है बाबूजी. आप को नहीं बताना है तो छोड़िये. मैं भी कहाँ आपको दोस्त बना बैठी थी.

किशोरीलाल – अरे तू तो नाराज़ हो रही है. चल तुझे जो डिटेल्स चाहिए न वह तस्वीरों में बताता हूँ.

सुमन – मतलब. – आप ने तसवीरें खींची.

किशोरीलाल – हाँ! हम एक दूसरे के साथ फ्री थे.

सुमन – तो कहाँ है तसवीरें. ?

किशोरीलाल – कुछ मोबाइल में है कुछ सीडी में कुछ असली फोटो हैं.

सुमन – बाप रे. आप और माँ तो.

किशोरीलाल – काफी एन्जॉय किये. अब तुझे दिखाऊं की न दिखाऊं यह सोच में पड़ा हूँ.

सुमन – अगर आपने नहीं दिखाया तो मैं आपसे बात नहीं करुँगी.

किशोरीलाल – नंगी तसवीरें हैं बहु. कैसे दिखाऊं. ?

सुमन – जैसे एक दोस्त दूसरे दोस्त को दिखाता है.

किशोरीलाल – तुझे प्रॉब्लम नहीं होगा. ?

सुमन – नहीं होगा बाबूजी. आप के कहने पे मैंने ट्रैक सूट पहन लिया. तो अब इससे आगे शर्माने की बात क्या. ?

इतना सुनके किशोरीलाल खड़े हो गए सुमन जैसे ही खड़ी होने वाली थी, उसकी कमर में हल्का सा दर्द आया, किशोरीलाल ने झटके में उसकी कमर संभाल ली और उसे सहारा दिया.

सुमन – वह एक्सरसाइज भारी पड़ गयी.

किशोरीलाल का हाथ सुमन की कमर को जकड़े हुए था, सुमन उनके सहारे खड़ी हुई और अपना हाथ उनके कंधे पे रख लिया.

सुमन – अब ठीक है!

किशोरीलाल – क्या ठीक है. मैं तुझे गरम पानी की थैली देता हूँ तू आराम कर.

सुमन – यह कहिये के आपको बचना है! है न! मैं तो ठीक हूँ.

किशोरीलाल – तू बड़ी चंट है. क्या करू मैं तेरा. ?

सुमन – तसवीरें दिखा दीजिये.

किशोरीलाल – नंगी तसवीरें देखने का बड़ा शौक हो रहा है. ?

सुमन – हम्म्म्म! हो रहा है.

किशोरीलाल – और कमर का दर्द. ?

सुमन – ठीक हो जाएगा.

किशोरीलाल उसकी ज़िद्द के सामने हार गए! सुमन उनके सहारे से उनके साथ उनके कमरे के तरफ चलती गयी। उसे अपने बेड पे बिठाके किशोरीलाल अपने कप्बोर्ड के लॉकर से दो मोटी एल्बम निकाले और अपना मोबाइल भी लेके आये.

किशोरीलाल – अपनी कमर को सहारा दो बहु कोहनी पे आधा लेट जाओ.

सुमन ने उनकी बात मानी और बेड पे चढ़के अपने बांयी कोहनी तकिये पे रखके आधा लेट गयी। किशोरीलाल अपनी सीधी कोहनी पे सहारा लेते हुए उसके सामने लेटे और सब बीच में रख दिया. उन्होनें सुमन का चेहरा फिर से देखा.

किशोरीलाल – क्यों करा रही हो मुझसे यह सब?

सुमन – बाबूजी मेरी खुशकिस्मती है के मेरा दोस्त मेरे ससुर ही हैं. अब तो आप दोस्त ज़्यादा लगते हैं और ससुर कम.

किशोरीलाल – ऐसी बातें करना कहाँ से सीखी बहु?

सुमन – कुछ सोहबत का भी असर होता है बाबूजी. अब दिखाईये न.

किशोरीलाल – मोबाइल से खींची देखेगी या सीडी या फोटो.

सुमन – सब.

किशोरीलाल – मैं क्लब जाता तो ठीक होता.

सुमन – अब फँस गए हैं तो पूरा फंसिए. दिखाईये.

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किशोरीलाल एक एल्बम खोलते हैं. सुमन की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं उसमें किशोरीलाल और उसकी सास उनके दोस्त और पत्नी के साथ बिलकुल नंगे हैं किशोरीलाल का लंड उनकी दोस्त की पत्नी चूस रही है और उनकी पत्नी को उनके दोस्त चाट रहे हैं। Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन किशोरीलाल की तरफ देखती है.

किशोरीलाल – क्या हुआ? तुझे ही देखना था कहा था न. चल रख देता हूँ.

सुमन – अरे नहीं बाबूजी मैं सब देखूंगी.

किशोरीलाल – अरे एक देख लिया तो सब देख लिया थोड़ी कुछ नया है दूसरी तस्वीरों में.

सुमन – होगा बाबूजी नहीं तो आप नहीं खींचते मैं बाद में आपके साथ सीडी भी देखूंगी.

किशोरीलाल – अरे बाप रे. चल देख जल्दी जल्दी.

सुमन – आराम से देखूंगी. अब तो देख लिया आपको. अब कैसी शर्म.

किशोरीलाल – अच्छा बाबा आराम से देख. मैं नीचे आँगन में टहलके आता हूँ.

सुमन उनका हाथ पकड़ के रोक देती है.

सुमन – मेरे साथ बैठिये न बाबूजी. आप भी पुरानी यादें ताज़ा कीजिये.

किशोरीलाल – पुरानी यादें ताज़ा करने में एक प्रॉब्लम है बहु.

सुमन – क्या बाबूजी?

किशोरीलाल – यादें तो ताज़ा हो जाएंगी पर कुछ और ताज़ा हुआ तो क्या करेंगे.

सुमन उनका इशारा समझ लेती है और मुस्कुराके तसवीरें देखने लगती है। दूसरी तस्वीर में किशोरीलाल उनकी दोस्त की पत्नी को पीछे से चोद रहे हैं. सुमन किशोरीलाल का हाथ पकड़ती है.

सुमन – बाबूजी सीडी लगाते हैं न.

किशोरीलाल – क्यों अब तस्वीरों से दिल भर गया?

सुमन – नहीं. यह बाद में देख लूंगी. सीडी देखते है न.

किशोरीलाल – देख एक काम कर यह सब तू रख ले. बाद में देख लेना.

सुमन – ठीक है बाबूजी अगर आपका दिल नहीं कर रहा है तो ठीक है.

किशोरीलाल – अच्छा बाबा मेरे साथ ही देख. चल वहाँ से मेरा लैपटॉप ला.

सुमन आहिस्ता से उठ जाती है और मेज़ पे पड़े लैपटॉप को उठाके लाती है.

किशोरीलाल – तुझे दर्द हो रहा है और तुझे मस्ती सूझी है.

सुमन – हाँ उसे बाद में देख लेंगे.

किशोरीलाल – देख वहाँ मेज़ पे देख तेल की बोतल है मैं तुझे थोड़ा लगा लेता हूँ आराम हो जाएगा.

सुमन – बाबूजी बाद में मालिश कर लीजिये अभी देखते हैं.

किशोरीलाल – ठीक है ला दे लैपटॉप.

सुमन लैपटॉप बेड पे रखती है, किशोरीलाल सीडी डाल देता है और स्टार्ट करता है, सुमन उनकी जांघ पे सहारा लेके बैठ जाती है। किशोरीलाल अपना हाथ उसकी पीठ पे रख देतें हैं सीडी प्ले होने लगती है. सीडी में दिखे लोगों को देख के ही हैरान हो जाती है और किशोरीलाल के चेहरे को देखती है। फिल्म में मनु और रामवती हैं और उसकी सास और किशोरीलाल. वह किशोरीलाल का चेहरा देखती है.

किशोरीलाल – क्या करें. हर समय बाहर तो नहीं जा सकते ना. बस अफ़सोस है के तेरी सास जल्द ही निकल गयी.

सुमन अपना ध्यान अब सीडी पे लगाती है। उसे थोड़ा अनकंफर्टबल लग रहा है कमर के वजह से। वह किशोरीलाल की तरफ देखती है.

सुमन – बाबूजी मैं ऐसे बैठती हूँ.

वह उठ गयी, सीडी चल रही थी, किशोरीलाल को समझ नहीं आ रहा था वह क्या करने की कोशिश कर रही है.

सुमन – बाबूजी आप थोड़ा मांडी डाल के बैठ जाईये मैं आपकी गोद में बैठती हूँ. कमर दुःख रही है.

किशोरीलाल – अरे बहु तू समझती क्यों नहीं. अरे रे रे. इतनी ज़िद्दी है न तू.

सुमन उनके गोद में बैठ जाती है. किशोरीलाल की तकलीफ शुरू हो जाती है. सुमन सीडी में रामवती की चूचियां दबा रहे हैं और उसके निप्पल्स चूस रहे हैं। मनु उसकी सास को ज़ोरों से चोद रहा है सुमन किशोरीलाल को घूरे जा रही है सीडी में.

सुमन – बाबूजी आप तो.

किशोरीलाल – क्या बहु.

सुमन – आप तो जैसे पोर्नस्टार हैं.

किशोरीलाल – मतलब.

सुमन – आपकी बॉडी. आपका स्टाइल आपका.

किशोरीलाल – मेरा क्या?

सुमन चुप हो जाती है फिर सीडी देखने लगती है। किशोरीलाल को समझ नहीं आ रहा है की वह अपने हाथ कहाँ रखे नीचे होने वाली हलचल को कैसे संभालें और सुमन का क्या करें. वह चुप हैं.

सुमन – बाबूजी. आपके मोबाइल में क्या है. ?

किशोरीलाल – अब यही सब है बहु. कुछ नया नहीं है.

सुमन – बताईये न.

किशोरीलाल – ले! देख ले खुद ही! कुछ फोटो हैं और एक ही वीडियो दो मिनट का. देख ले.

सुमन – अच्छा बाबा ठीक है.

सीडी ख़तम हो गयी, किशोरीलाल ने राहत की सांस ली। सुमन उठने लगी उसकी गांड किशोरीलाल के लंड से टकराई, किशोरीलाल थोड़े सकपका गए, सुमन उतर गयी बेड पे से.

सुमन – बाबूजी मैंने आपको बहुत सताया पर आप वाकई में मेरे अच्छे दोस्त साबित हुए। आज क्लब नहीं गए मेरे साथ रहे जो बातें मैं हैंडल नहीं कर पाती उन के लिए तैयार किया. कल तक अकेला पन महसूस होता था अब नहीं और यह सब आप की वजह से हुआ है! बाबूजी. Sasur ne bahu ko pela sex story

किशोरीलाल – हाँ बहु.

सुमन – क्या मैं एक एल्बम अपने पास रख सकती हूँ. ?

किशोरीलाल – अरे अगर उमेश ने देख लिया तो.

सुमन – कल लौटा दूंगी.

किशोरीलाल उसका चेहरा देखते रहे फिर हाँ में सर हिलाया और लैपटॉप बंद करके उसके पास लाये.

किशोरीलाल – यह भी रख और और एक चीज़ दिखाता हूँ.

सुमन – क्या बाबूजी?

किशोरीलाल – रुक.

किशोरीलाल कप्बोर्ड के पास गए और एक मोटी सी किताब निकाली लॉकर से और सुमन के पास आये, उसे खोला और सुमन को दिखाए.

किशोरीलाल – देख रही है न. यह रख. इसमें हिंदी में कहानियां है मस्तराम की और बहुत सारी तसवीरें मज़ा आएगा.

सुमन – मुझे इसकी ज़रुरत नहीं है बाबूजी.

किशोरीलाल – तो फिर यह एल्बम और सीडी और लैपटॉप.

सुमन – मुझे आपको देखना है. किसी और को नहीं.

किशोरीलाल उसे देखके और सुनके दंग रह जातें हैं। सुमन करीब आके उनके गाल को चूम लेती है.

सुमन – आप बहुत अच्छे हैं बाबूजी. यह आपके और मेरे बीच ही रहेगा. और मैं आपकी पसंद की सब्ज़ी बना रही हूँ साथ खाएंगे.

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किशोरीलाल ने सुमन की आँखों में एक अलग सी बात देखि कहीं उनकी सोच गलत तो नहीं थी। उनकी बहु इतना खुल रही थी उन्होंने सुमन को अपने कमरे से जाते देखा। सिर्फ एक एल्बम उठाये और फिर बेड पे बैठ गए सोचते हुए के क्या जो भी हुआ वह ठीक था. करीब नौ बजे किशोरीलाल किचन में आये, सुमन एक पतली सी मैक्सी में थी, स्लीवलेस मैक्सी उसके घुटनों तक ही था। जैसे ही किशोरीलाल किचन में एंटर किये सुमन पलटी उसकी चूचियां हिली, किशोरीलाल को अंदाजा हो गया अंदर बहु ने कुछ पहना नहीं था.

सुमन – पनीर पालक बाबूजी. पसंद है न आपको.

किशोरीलाल – आज कुछ और मांगता तो मिल जाता.

सुमन – मांगिये न बाबूजी. मिल जाएगा.

उसकी बात में कुछ था पर किशोरीलाल ने अपनी बात रोक ली.

सुमन – बाबूजी. यह लीजिये.

सुमन ने उन्हें परोसा उन्होंने उसकी तरफ देखा.

किशोरीलाल – तू नहीं खायेगी बहु.

सुमन – खा रही हूँ बाबूजी. आप शुरू कीजिये.

किशोरीलाल – नहीं तू अपने लिए भी परोस फिर खाऊंगा.

सुमन – अच्छा लेती हूँ.

सुमन ने खुद को परोसा और उनके सामने कुर्सी पे बैठ गयी. दोनों चुप चाप खा रहे थे फिर किशोरीलाल ने उसे पूछा.

किशोरीलाल – तेरी कमर कैसी है. दर्द है अभी?

सुमन – है बाबूजी पर थोड़ा. ठीक हो जाएगा.

किशोरीलाल – मालिश कर दूँ तेरी.

सुमन ने उनका चेहरा देखा.

सुमन – मैं आपसे कैसे. ?

किशोरीलाल – ठीक है गरम पानी की थैली ले ले.

सुमन – नहीं बाबूजी मालिश ठीक रहेगा. अगर आपको ठीक लगे तो.

किशोरीलाल – एल्बम देख ली. ?

सुमन – नहीं. बाद में देख लूंगी. खाना पकाना था.

रात का खाना हो चुका था किशोरीलाल हॉल में बैठके टीवी देख रहे थे। सुमन ने उन्हें आवाज़ दी.

सुमन: बाबूजी आपको कुछ चाहिए मैं ज़रा शावर ले लू?

किशोरीलाल: नहीं बहु सब तो दे दिया जा नहा ले…

सुमन: (अपने होंठ दबाते हुए और धीमे से) कहाँ कुछ दिया है…

किशोरीलाल: क्या?

सुमन: नहीं कुछ नहीं बाबूजी… आप वह मालिश का भूले तो नहीं न शावर पंद्रह मिनट में हो जाएगा…

सुमन शरारती मुस्कान चेहरे पे लिए हुए अंदर चली गयी। किशोरीलाल ने उसकी बात सुनी थी और समझी भी थी. उन्होनें अपने पैर सोफे पे चढ़ा दिए थे और पलटी बाँध दी थी अपने ट्रैक्स के ऊपर से अपने लंड को सहलाने लगे और एक लम्बी सांस भरी.

किशोरीलाल: माया कहाँ है तू…

उनका लंड तनने लगा था, अपना सुपाड़ा दो उँगलियों के बीच दबाने लगे और टीवी की न्यूज़ रीडर को देखके पंद्रह मिनट के लिए ख्यालों में चले गए. समय जल्दी बीत गया और शायद पच्चीस मिनट बीत गए थे वह उठे और वाशरूम चले गए. वाशरूम से निकले और सुमन के कमरे से गुनगुनाने की आवाज़ आने लगी। वह उसके दरवाज़े पे गए और खुले दरवाज़े पे खटखटाये बिना ही अंदर जाने लगे। Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन: खटखटाने की क्या ज़रुरत है बाबूजी आ जाईये..

किशोरीलाल अंदर आये और देखा की सुमन एक स्लीवलेस घुटनों तक की नाइटी में ड्रेसिंग टेबल के पास बाल बना रही थी। किशोरीलाल उस कमरे में रखी कुर्सी पे बैठ गए. सुमन ने कंगी रखी और उनके पास आ गयी.

सुमन: तेल नहीं लाये बाबूजी शीशी आपके कमरे में ही थी…

किशोरीलाल: तूने अभी स्नान किया बहु तेल से बदन चिपचिपा हो जाएगा। कपड़ों के ऊपर से मालिश कर दूंगा…

सुमन: बिना तेल के असर कैसे होगा बाबूजी और कपड़ों के ऊपर से बदन को हाथों का सेक कैसे मिलेगा?

आप बैठिये मैं लाती हूँ आपके कमरे से तेल की शीशी..

किशोरीलाल: ठीक है ले आ…

सुमन कमरे से निकल गयी मटकते हुए, किशोरीलाल उसके हिलते हुए बदन को घूर रहे थे, लंड टाइट हो रहा था. सुमन जल्द ही लौटी और किशोरीलाल को तेल की शीशी दे दी.

सुमन: बिस्तर पे लेट जाऊं बाबूजी?

किशोरीलाल: हाँ लेट जा और दर्द की सही जगह बता दे… पर सुन यह मैक्सी में नहीं हो पायेगा, दिन में जो ट्रैक पहनी थी वह पहन ले…

सुमन: ठीक है बाबूजी नयी पहन लेती हूँ वह तो डाल दी धोने में…

सुमन ने कप्बोर्ड में से ट्रैक पैंट निकाली और एक टी-शर्ट और वाशरूम चली गयी। किशोरीलाल भी ट्रैक और टी-शर्ट में ही थे. दो मिनट बाद सुमन बाहर आयी और किशोरीलाल ने देखा के उसने टी-शर्ट के अंदर कुछ पहना नहीं था। सुमन सीधे बिस्तर पे बैठ गयी और किशोरीलाल तेल की शीशी हाथ में लिए हुए उसके पास आके बिस्तर पे बैठ गए उसकी बगल में.

किशोरीलाल: अब सही जगह बता..

सुमन ने सीधे हाथ से अपनी कमर दबायी और सही दर्द की जगह ढूंढी, फिर बांये हाथ से किशोरीलाल का हाथ उस जगह पे रख दिया, अपना दांया हाथ हटा के.

किशोरीलाल: चल लेट जा पेट पे मैं साइड से मालिश कर देता हूँ..

दर्द की जगह उसकी ट्रैक्स के किनारे के पास ही थी, बांयी कमर पे। किशोरीलाल खड़े हुए और सुमन पेट के बल लेट गयी अपनी कवियों पे सहारा लेके सर को उठाये हुए.

सुमन: बाबूजी आप को जो जगह बतायी उसके नीचे भी दर्द है..

किशोरीलाल: फैल रहा होगा सही जगह पे मालिश करूंगा तो फैलेगा नहीं…

किशोरीलाल ने अपनी हथेली में थोड़ा तेल ले लिया और सुमन की दांयी तरफ कमर के लगा दिया और अपनी दांयी हथेली से मालिश करने लगे। वह सुमन की गांड देख रहे थे जो हिल रही थी उनके हाथ के ज़ोर से. सुमन ने अपना दांया हाथ बिस्तर के पड़े तकिये के नीचे ले गयी और किशोरीलाल के दिए एल्बम और मस्तराम की नोवेल्स खींच निकाली.

किशोरीलाल: अब क्या तू मालिश करवाते करवाते यह सब देखेगी… दिल नहीं भरा तेरा..

सुमन: नहीं बाबूजी दिल नहीं भरा..

किशोरीलाल ने उसका टी-शर्ट कमर से थोड़ा उठा लिया था मालिश करने के लिए. उसकी गोरी कमर देखके वह हुए उत्तेजित हो रहे थे सुमन एल्बम में नंगी तसवीरें देख रही थी। किशोरीलाल बिस्तर पे बैठके मालिश भी कर रहे थे और सुमन को एल्बम देखते हुए देख भी रहे थे.

सुमन: बाबूजी…

किशोरीलाल: बोल बहु..

सुमन: नहीं कुछ नहीं..

किशोरीलाल: अरे बोल तो क्या बात है..

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सुमन: मैं सोच रही थी बाबूजी जब माँ के साथ मनु और आप रामवती के साथ मेरा मतलब है आपको कैसा लगता था?

सुमन ने किशोरीलाल को एक चित्र बताके पूछा और आधी करवट पे उनकी तरफ देखा। किशोरीलाल का दांया हाथ सुमन की कमर पे रुक गया पूरी हथेली.

किशोरीलाल: मज़ा आता था बहु, के जिससे मैं प्यार करता था वह मेरी मौजूदगी में खुलके एक गैर मर्द के साथ बिना मेरी फ़िक्र किये हुए यह सब कर सकती थी और मुझे करने देती थी.. जब मैं देर से घर आता किसी काम में उलझ के तो उसने कभी मुझसे यह सवाल नहीं किया के मैं कहाँ था.. हम एक दूसरे पे ज़्यादा भरोसा करने लगे थे…

सुमन: बाबूजी क्या उमेश आपकी तरह ही समझदार है..

किशोरीलाल: हाँ बहु बहुत समझदार है…

सुमन ने उनका चेहरा देखा दोनों की आँखें मिली. सुमन ने फिर पलटके एल्बम में देखा. किशोरीलाल मालिश करने लगे. कुछ देर बाद उन्होंने अपना हाथ रोका.

किशोरीलाल: अब ठीक लग रहा है या अब भी..

सुमन: हम्म्म..पर दिल नहीं भरा…

किशोरीलाल: ठीक है लेटी रह थोड़ी देर और कर लेता हूँ और अब तू बस भी कर वह एल्बम की तसवीरें कितना देखेगी..

सुमन: आपको देख रही हूँ…

किशोरीलाल: मुझे लगा मनु को देख रही है और मुझे क्या देखना मैं तो यहीं हूँ..

सुमन उठ के बैठ गयी और एल्बम उसके हाथ में थी वह किशोरीलाल के सामने थी उसने एल्बम की एक तस्वीर उनको दिखाई और तस्वीर में उनके लंड पे ऊँगली रखी.

सुमन: यहीं हैं पर ऐसे नहीं हैं बाबूजी और मनु का इतना अच्छा नहीं है..

किशोरीलाल और उसकी आँखें मिली फिर से उनका लंड भी टाइट हो चुका था।

सुमन ने नीचे देखा उनका उभार देखा और फिर उन्हें देखा.

सुमन: आपने दूसरी शादी क्यों नहीं की बाबूजी..

किशोरीलाल: बहु तेरी सास जैसी कोई नहीं मिलती और बाकी का काम रामवती संभाल लेती है… अब तू सो जा…

सुमन: मेरा दर्द खत्म नहीं हुआ बाबूजी! पर अगर आपको नींद आ रही है तो..

किशोरीलाल: अरे नहीं मैं तो तेरा सोच रहा था, लेट जा और कर देता हूँ..

सुमन: मज़ाक कर रही हूँ बाबूजी दर्द चला गया पर दिल नहीं भरा.. पर आप आराम कीजिये..

किशोरीलाल: इतनी जल्दी नींद कहाँ आएगी बहु आ लेट जा..

सुमन लेट गयी और अपना टी-शर्ट थोड़ा ऊपर कर लिया। किशोरीलाल ने हथेली भर के तेल ले लिया.

किशोरीलाल: दर्द फैल गया है लगता है..

सुमन थोड़ा पलट के मुस्कुरायी.

सुमन: नीचे भी उतरा है बाबूजी..

किशोरीलाल भी मुस्कुरा दिए और सुमन की पीठ पे अपनी हथेली रख दिए सुमन ने एल्बम हटा दी और अपना सर तकिये पे रख दी अब किशोरीलाल ने दोनों हथेलियों से उसकी पीठ दबा दी.

सुमन: आह्ह्ह्हह्हह अच्छा है बाबूजी ऐसा ही कीजिये ज़रा ज़ोर से…

किशोरीलाल ने अब थोड़ा और ज़ोर लगाया पर साइड में बैठने की वजह से ज़ोर ज़्यादा लगा नहीं पाए। सुमन फिर से आधी करवट पे पलटी.

सुमन: बाबूजी बदन टूट रहा है थोड़ा ऊपर काँधे तक कीजिये न..

किशोरीलाल: पूरे बदन की मालिश करवाएगी क्या बहु..

सुमन: अगर आपको तकलीफ न हो तो बाबूजी…

किशोरीलाल: तेरी टी-शर्ट चिप चिपी हो जायेगी तेल से..

सुमन ने अपनी टी-शर्ट थोड़ी और ऊपर कर दी अपने चूचियों तक, अब चूचियाँ आधी ढकी हुई और आधी खुली थी. किशोरीलाल उसकी नंगी पीठ देख रहा था और साइड से आधी चूचि और तना हुआ निप्पल.

सुमन: बाबूजी अब ठीक है या और ऊपर कर दूँ…

किशोरीलाल: तुझे जहां तक कराना है वहाँ तक सही…

सुमन ने टी-शर्ट और ऊपर कर दी उसकी चूचि अब आज़ाद थी। किशोरीलाल की नज़र उसपे थी सुमन ने फिर अपनी हथेलियों की कवियों पे सहारा लिया और एल्बम खोल दी.

किशोरीलाल: तू इस एल्बम को छोड़ेगी नहीं न…

सुमन ने सर न में हिला दिया। किशोरीलाल अपने घुटनों के बल आ गया और दोनों हथेलियों को उसकी कमर पे रखके ज़ोर से ऊपर तक ले गया। सुमन ने एक लम्बी सिसकी भरी.

सुमन: आआह्ह्ह्ह बाबूजी ऐसे ही कांधो तक..

किशोरीलाल फिर से अपनी हथेलियां नीचे ले गया कमर तक और फिर ज़ोर से ऊपर काँधे तक। पर साइड पे बैठने से मामला कुछ जम रहा नहीं था.

सुमन: बाबूजी आपके दांये हाथ से कुछ मज़ा नहीं आ रहा है बांया सही चल रहा है…

किशोरीलाल: रुक मैं बिस्तर के उस तरफ आता हूँ…

सुमन आधी करवट पे पलटी उसकी बांयी नंगी चूचि और तना हुआ निप्पल किशोरीलाल की आँखों के सामने था.

सुमन: बाबूजी अगर आपको दिक्कत न हो तो आप मेरी जाँघों पे बैठके मालिश कीजिये न उससे ज़ोर आ जाएगा..

किशोरीलाल उसकी चूचि देखे जा रहा था। सुमन ने गले से अपना टी-शर्ट आज़ाद कर दिया और साइड पे बिस्तर पे रख दिया और उनकी तरफ देखा.

सुमन: बाबूजी अब कीजिये न ज़रा ज़ोर लगा के फिर मैं आपकी मालिश करुँगी..

किशोरीलाल: क्या आज रात भर मालिश करवाने और करने का इरादा है क्या..

सुमन: नींद तो नहीं आ रही है बाबूजी मालिश कर और करवा के शायद अच्छी नींद आ जाए.. अब बैठ भी जाईये न बाबूजी…

किशोरीलाल उसकी जाँघों पे बैठ गए उनका तना हुआ लंड सुमन की जाँघों पे लगा दोनों को इस बात का एहसास हुआ। किशोरीलाल ने अपनी हथेलियां उसकी नंगी पीठ पे रखी और कसके ऊपर कांधो तक ले गए. सुमन ने सिसकी भरी किशोरीलाल का तना हुआ लंड सुमन की गांड पर भी घिसा। किशोरीलाल ने ऐसे तीन बार किया फिर हथेलियों पे और तेल भरा और फिर से मालिश करने लगे। सुमन मज़े ले रही थी और अब किशोरीलाल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उनके लंड घिसने का सुमन की गांड पे पर सुमन मज़े ले रही थी. सुमन अब भी कवियों पे एल्बम की तसवीरें देख रही थी और उसकी दोनों चूचियों के निप्पल बिस्तर पे घिसे जा रहे थे. सुमन ने थोड़ा साइड से किशोरीलाल को देखा. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन: बाबूजी यह तस्वीर क्या मनु ने निकाली…

किशोरीलाल ने देखने की कोशिश की उसके कंधे से आगे पर उन्हें दिखाई नहीं दिया उन्होनें ऊपर सरका और उसकी गांड पे बैठके आगे झुके अब उनका पेट उसकी पीठ पे था और उनका चेहरा उसके काँधे पे.

किशोरीलाल: कौनसी बहु.. सुमन ने उनको वह तस्वीर दिखाई.

सुमन: यह वाली आपकी माँ की और रामवती की..

किशोरीलाल: हाँ उसीने निकाली तेरी सास चाहती थी के हम तीनो की कुछ तसवीरें निकले तो आगे की सारी तसवीरें हमारी हैं..

सुमन: माँ बड़ी शौक़ीन थी है ना…

किशोरीलाल: हाँ बहु बहुत मज़े दिए और लिए उसने…

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किशोरीलाल का लंड अब सुमन की गांड की दरार में घुसा हुआ था उनका सुपाड़ा उसकी चूत पे रगड़ रहा था और सुमन भी अपनी गांड उसपे दबा रही थी। किशोरीलाल का चेहरा अब सुमन के गालों के करीब था सुमन उनके तरफ पलटी और दोनों के होंठ अब एक दूसरे से एक सेंटीमीटर की दूरी पे थे.

सुमन: माँ और आप रोज़..

किशोरीलाल: हाँ बहु तेरी सास और मैं रोज़ इसी तरह रहते..

सुमन: अब आपको रामवती के साथ उतना ही मज़ा आता है बाबूजी?

किशोरीलाल: नहीं बहु अब तो मनु और रामवती लगे रहतें हैं मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं होता…

सुमन और उनकी आँखें एक दूसरे को घूर रही थी.

सुमन: आप बहुत अच्छे हैं बाबूजी..

किशोरीलाल: तू भी बहुत अच्छी है बहु उमेश को अच्छा जीवन साथी मिला है..

सुमन: बाबूजी क्या आप मुझे आपके फ़ोन के वीडियो दिखाएंगे..

किशोरीलाल: तू देखना चाहती है..

सुमन: हाँ बाबूजी मैं आपको माँ के साथ देखना चाहती हूँ यह तस्वीरों से दिल नहीं भरता..

किशोरीलाल ने बिस्तर पे पड़ा अपना फ़ोन उठा लिया और ऐसे ही लेटे रहे उसपे फ़ोन उसके सामने कर दिया और उनके हाथ सुमन के कांधो के ऊपर से थे फ़ोन को खोलते. उन्होनें एक वीडियो खोला.

किशोरीलाल: ले तू पकड़ ले फ़ोन को..

सुमन: बाबूजी आप पकड़िए ना नीचे से हाथ डालके ताकि दूसरा भी चला पाएं..

किशोरीलाल: मालिश नहीं करवानी क्या..

सुमन: मालिश ही तो हो रही है..

किशोरीलाल के लंड पे अपनी गांड दबायी सुमन ने और आंख मार दिया। उन्होनें अपने दोनों हाथ उसकी बगल के नीचे से उसके चेहरे के सामने ले आये उनके हाथों से उसकी चूचियां दबी. वीडियो शुरू हुआ.

किशोरीलाल: खुश है अभी..

सुमन: हाँ बहुत..

किशोरीलाल: अगर उमेश हम दोनों को ऐसे देखेगा तो क्या सोचेगा..

सुमन: आपने ही तो कहा वह बहुत समझदार है बाबूजी..

किशोरीलाल: बातें पकड़ लेती है तू है न..

सुमन मुस्कुरायी सुमन ने जान बूझकर अपनी चूचियां और दबायी किशोरीलाल के हाथों पे और नीचे अपनी जांघें थोड़ी फैला दी किशोरीलाल ने भी अपना लंड और अंदर दबा दिया, दोनों के जिस्म चिपक गए थे. दोनों के गाल भी मिल चुके थे, फ़ोन पे उसकी सास नंगे किशोरीलाल का लंड चूस रही थी.

सुमन: इसमें सिर्फ आप दोनों है न..

किशोरीलाल: हाँ बहु तुझे रामवती और मनु के भी देखना है…शायद इस वीडियो में मनु बाद में आता है. रामवती वीडियो बना रही है..

सुमन: नहीं मुझे सिर्फ आपका देखना है..

किशोरीलाल इस बात पे हिल गया सुमन को भी एहसास हुआ उसने क्या कहा वह मुसकुराई किशोरीलाल का चेहरा देखके. किशोरीलाल भी अपना सर हिला के मुस्कुरा दिया और अपना लंड उसकी चूत पे दबा दिया। सुमन ने अपनी जांघें और फैला दी और किशोरीलाल ने अपना सुपाड़ा उसकी और चुबा दिया, सुमन ने सिसकी भरी. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन: इसका वॉल्यूम बढाईये न बाबूजी मुझे सुनना है..

किशोरीलाल: अरे बहु वॉल्यूम रहने दे..

सुमन: कीजिये न बाबूजी सुनाईये न आप दोनों क्या बातें करते थे..

किशोरीलाल: तू मानेगी नहीं न..

किशोरीलाल अब हाथों को उसकी चूचि पे दबा के फ़ोन का वॉल्यूम बढ़ा दिए। सुमन देख रही थी किशोरीलाल बिस्तर पे चित और नंगे लेटे थे और सुमन की सास नंगी उनकी जांघ पे लेट के उनका लंड चूस रही थी. Sasur ne bahu ko pela sex story

किशोरीलाल: चूस मेरी जान चूस फिर तेरी चूत को चाटता हूँ…

सास: हाँ मेरी जान इसे चोद दो पहले बाद में चूत चाट लेना.. सुमन ने किशोरीलाल का चेहरा देखा, लाल था उन्होनें अपना चेहरा उसके काँधे और गाल के बीच छुपा दिया.

सुमन: आप दोनों तो उमेश और मेरे से ज़्यादा मज़ा लेते थे। बाबूजी उमेश तो चुप रहता था..

किशोरीलाल: हाँ हम दोनों बातूनी थे बहु और चुप रहने से मज़ा थोड़ी न आता है, अब तू बंद कर दे मैं तेरी मालिश करता हूँ..

सुमन: बाबूजी अब इतना देखने के बाद आप शर्मा रहे हैं..

किशोरीलाल: शर्मा नहीं रहा बहु पर तू अकेली भी तो देख सकती है रख ले मेरा फ़ोन..

सुमन: नहीं बाबूजी आप और मैं इसे साथ में देखेंगे प्लीज..

किशोरीलाल: अच्छा देख ले बाबा..

रामवती: मालिक आप और मालकिन दोनों एक साथ चटाई और चुसाई कीजिये ना मज़ा आएगा..

सास: तुझे अगर चटवाने है तो बैठ जा इनके मुँह पे ज़्यादा टिप्स ना दे वहाँ से..

किशोरीलाल: आजा रामवती फ़ोन छोड़ मैं चाटता हूँ तुझे..

मनु: लो आ गया मैं मालिक थोड़ा काम था..

रामवती: ले मनु वीडियो बना मैं मालिक के मुँह पे बैठती हूँ..

किशोरीलाल: अरे वीडियो छोडो तुम दोनों भी आ जाओ बिस्तर पे मनु तू पीछे से मालकिन की ले और मैं रामवती की चूत चाटता हूँ..

सुमन ने फिर से किशोरीलाल का चेहरा देखा, किशोरीलाल का लंड बिलकुल तन चूका था उसकी गांड में। किशोरीलाल ने उसकी चूचि अपनी बाज़ुओं से दबायी.

सुमन: आप लोग जितना मज़ा लेते थे बाबूजी मैं शायद ही ले पाऊं..

किशोरीलाल: अरे बहु उमेश देगा बहुत मज़ा उससे बात कर..

सुमन: नहीं बाबूजी उमेश नहीं कर पायेगा इतना सब इतना शौक़ीन नहीं है वह आपकी तरह.. आप एक से चुसवा सकते हो और एक को चाट सकते हो उमेश तो झड़ जाता अगर दो औरतों को नंगी देखता तो..

Sasur ne bahu ko pela raat bhar

किशोरीलाल ने उसकी बात सुनके उसके काँधे को चूमा। सुमन ने अपनी चूत रगड़ी किशोरीलाल के लंड पे.

किशोरीलाल: मायूस मत हो बहु सब ठीक हो जाएगा..

सुमन ने अपने चेहरे को किशोरीलाल के चेहरे के पास घुमाया.

सुमन: बाबूजी जो नहीं हो सकता वह नहीं हो सकता पर आप यह मत समझिये के मैं अपने घर की बात बाहर जाने दूंगी। यह बस सिर्फ हम दोनों के बीच रहेगी…

किशोरीलाल: के तू मेरे बेटे से संतुष्ट नहीं है..

सुमन: संतुष्ट हूँ बाबूजी बस यह है की मेरे खयालात कुछ आप जैसे हैं और उमेश के मेरे और आपसे अलग..

किशोरीलाल उसपे से सरक के आधी करवट पे हो गया उसकी बगल में सुमन ने भी आधी करवट पे उसके सामने अपने आप को किया। दोनों आमने सामने थे. सुमन का ऊपरी बदन नंगा था पर अब किशोरीलाल ने उस बात को अटपटा नहीं समझा. सुमन ने अपने खुले बाल पीछे किये बांधके। किशोरीलाल उसकी खुली और नंगी चूचि को देख रहा था। सुमन का चेहरा मायूस था. Sasur ne bahu ko pela sex story

सुमन: आप और माँ कैसे एक दूसरे को सहारा देते हुए, एक दूसरे की चाहत को अपना लिए, ताकि आपका रिश्ता बेहतर हो, वैसे उमेश नहीं कर पायेगा, वह कितना ही समझदार क्यों न हो..

सुमन के गाल पे किशोरीलाल ने अपना हाथ रख दिया, सुमन ने उनके हाथ पे अपना हाथ रख दिया, दोनों एक दूसरे को देखते रहे.

सुमन: पर मैं इस घर की मर्यादा पार नहीं करूंगी बाबूजी, न ही इस बात पे उमेश से बात करुँगी, अगर उन्होनें पहल की तो साथ दूंगी नहीं तो नहीं…

किशोरीलाल ने आगे होके उसका माथा चूमा.

किशोरीलाल: चल अब तू सो जा मैं भी यह टी-शर्ट बदलके सो जाता हूँ चिपचिपा हो गया तेरे बदन से लग के…

सुमन ने अपनी ऊँगली उनके ट्रैक्स में तने हुए लंड के सुपाड़ी पे फिराई और मुस्कुरायी.

सुमन: इसे तो नींद नहीं आ रही है..

किशोरीलाल ने उसके गाल को चूमती दी.

किशोरीलाल: यह तो तेरी सास के मरने के बाद चैन से सोया ही नहीं है… छोड़ दे नहीं तो यह रात भर सताएगा…

सुमन ने हाथ हटा दिया और उनकी कमर में रख दिया.

सुमन: रात भर थोड़ी न आप इसे ऐसे रखोगे कोई न कोई इलाज करोगे न इसका..

किशोरीलाल: करना तो पड़ेगा बहु..

सुमन: क्या.. किशोरीलाल ने फिर उसका गाल दो उँगलियों में कसा.

किशोरीलाल: देख अब तू सो जा मुझे सुबह कसरत के लिए जल्दी उठना है..

सुमन ने मुँह बनाया फिर मुस्कुरा दी, किशोरीलाल और उसकी नज़रें मिली और फिर वह वहाँ से सुमन को तरसा के निकल गए.

आगे की कहानी अगले भाग मे, कहानी पसंद हो तो नीचे कमेंट मे ज़रूर बताना। इस कहानी का दूसरा भाग आप यहाँ पढ़ सकते है => मुझे आपका लंड चाहिए बाबूजी भाग-2

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