Sasur Or Bahu ki chudai ki hindi sex story– के सन्नाटे में नीता का दिल धड़क रहा था। घर में सब सो चुके थे, लेकिन उसकी आंखों में ससुर की वो लालची नजरें घूम रही थीं। पतली कमर लचकाती हुई, बड़ी-बड़ी छातियां थिरकती हुई, वो चुपके से ससुर के कमरे की ओर बढ़ी। दरवाजा खुला था, जैसे कोई इंतजार कर रहा हो। अंदर घुसते ही उसकी सांसें तेज हो गईं।
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ससुर बिस्तर पर लेटा था, गाढ़ी मूंछों वाला चेहरा चांदनी में चमक रहा था। नीता की नजरें लालच से भरीं, वो जानती थी कि आज रात उसकी चाहत पूरी हो जाएगी। ससुर की आंखें खुलीं, और वो मुस्कुराया। ‘क्या बात है बहू, इतनी रात को?’ उसकी आवाज गहरी थी, जैसे कोई शिकारी बोल रहा हो। नीता कुछ न बोली, बस नजदीक आ गई। ससुर की मजबूत बांहें अचानक फैलीं और नीचे को कसकर पकड़ लिया। नीता का शरीर सिहर उठा। ‘ससुर जी…’ वो फुसफुसाई, लेकिन उसकी आंखों में वही लालच झलक रही थी।
ससुर ने धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के हुक खोले, फिर जोर से खींचा। कपड़े फटने की आवाज गूंजी, नीता की बड़ी छातियां बाहर उछल आईं। नंगे स्तनों पर ठंडी हवा लगी, लेकिन ससुर की गर्म सांसें उन्हें ढकने लगीं। नीता के मन में उथल-पुथल मची थी। ये गलत था, लेकिन उसकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी। ससुर ने अपनी मोटी मूंछें छूते हुए उसके एक निप्पल को मुंह में लिया।
होंठ चूमें, जीभ घुमाई। ‘आह… ससुर जी…’ नीता की चीख निकली। वो जोर से चूसा, दांतों से काटा। नीता का शरीर कांप रहा था, उसकी पतली कमर ससुर की गोद में मटक रही थी। ससुर की दूसरी हाथ ने दूसरी छाती को मसलना शुरू किया, उंगलियां निप्पल को चुटकी लेतीं। नीता की सांसें तेज, वो सोच रही थी कि ये मजा कब से छिपा हुआ था।
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‘तुम्हारी ये चूचियां तो मेरी हैं बहू,’ ससुर ने गरजते हुए कहा, जीभ से एक चक्कर लगाया। नीता ने उसके सिर को दबाया, ‘हां ससुर जी, सब आपका…’ ससुर नीचे सरक गया। नीता की साड़ी खींची, पेटीकोट फाड़ दिया। अब नीता नंगी लेटी थी, उसकी चूत बालों से ढकी, लेकिन गीली चमक रही थी।
ससुर की कामुक नजरें वहां टिक गईं। ‘देखो तो, कितनी लालची हो गई हो,’ वो हंसा। नीता शरमाई, लेकिन उसकी टांगें खुद-ब-खुद फैल गईं। ससुर ने मुंह झुकाया, चूत पर चूमा। जीभ बाहर निकली, क्लिट को चाटा। नीता चिल्लाई, ‘ओह्ह… ससुर जी!’ ससुर की उंगलियां अंदर घुसीं, गीली चूत को मसलने लगीं।
वो दो उंगलियां डालकर अंदर-बाहर करने लगा, चूत का रस बहने लगा। नीता का शरीर उछल रहा था, उसकी बड़ी छातियां हिल रही थीं। ‘गीली हो गई हो बहू, अब चुदाई की बारी,’ ससुर ने कहा, जीभ से चूत को चाटते हुए। नीता के मन में सिर्फ वासना थी, वो ससुर की ललची छुअनों में खो गई। ससुर ने अपना धोती खोला।
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उसका मोटा लंड बाहर आया, सख्त और लंबा। नीता की आंखें चमक उठीं। ‘ये लो बहू,’ ससुर ने कहा और लंड को नीता के मुंह पर रगड़ा। नीता ने चाटा, मुंह में लिया। ससुर ने सिर पकड़कर धक्का दिया, गले तक चला गया। नीता गग कर रही थी, लेकिन लालच से चूस रही थी।
ससुर ने बाहर निकाला, फिर नीता की टांगें चौड़ी कीं। लंड चूत पर रगड़ा, फिर जोर का धक्का मारा। ‘आह्ह!’ नीता चीखी। ससुर का लंड पूरी तरह अंदर समा गया, चूत को फाड़ता हुआ। वो जोर-जोर से चोदने लगा, कमर झटकते हुए। नीता की चूत में तेज धप्पे पड़ रहे थे, रस छलक रहा था।
‘चोदो ससुर जी, जोर से!’ नीता चिल्लाई, नाखून ससुर की पीठ पर गाड़ते हुए। ससुर ने स्पीड बढ़ाई, लंड अंदर-बाहर, चूत को चीरता हुआ। नीता का शरीर कांप रहा था, ऑर्गेज्म करीब था। ससुर की गाढ़ी मूंछें पसीने से भीगीं, वो और तेज चोदा। लेकिन रात अभी लंबी थी, नीता जानती थी कि ये लालच कभी न रुकेगा।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है, कृपया वास्तविक जीवन में कहानी में घटित किसी भी चित्र का प्रयोग करना घातक हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी लेखक या प्रस्तुतकर्ता की नहीं होगी, तो कृपया इसे अपनी निजी जिंदगी से न जोड़ें और अपने बुद्धि-विवेक से काम लें।
